• shubhydv 14w

    जिस राह पर… हर बार मुझे
    अपना कोई छलता रहा…
    फिर भी न जाने क्यों मैं
    उस राह ही चलता रहा…

    सोचा बहुत इस बार…
    रौशनी नही धुँआ दूँगा
    लेकिन चिराग था फितरत से
    जलता रहा…जलता ही रहा…