• bhushan 3w

    सच और झूठ को कुछ ऐसे जाना है,
    एक को पहले दूसरे को बाद में जाना है।

    हैं दोनों ही एक ही सिक्के के दो पहलू,
    यकीं मानो, न कोई अपना है, न बेगाना है।

    एक छांव सा है और एक नई धूप सी है,
    दोनों को ही जीने के लिए जरूरी जाना है।

    ये जो कहता है कि ये बुरा है और वो भला है,
    यकीं मानो उसने अभी बड़ा ही कम जाना है।

    ©bhushan