• vijaypal666 13w

    आंच

    हसरतों की जकड़ में हूँ,
    उल्फतों की पकड़ में हूँ !
    धुंआ धुंआ सी हो रही,
    ये ज़िन्दगी बर्फ सी घुल रही !
    हाथों से झांकती लकीरों में,
    कोई आंच सी पिघल रही !!
    -विजय
    ©vijaypal666