• ruchikadhoundiyal 23w

    आबरू छीनी जाऐगी जब उसकी,, बोलो क्या तुम्हारा ग़ुरूर नही शर्मायेगा ।।

    दोगे जब इक इक ज़ख्म उसे,, बोलो तुम्हारा गुनाह कैसे भर पायेगा ।।

    पूजते हो देवी बना कर हर साल उसे,, बोलो फ़िर क्या तुम्हारा मज़हब रह जाएगा ।।

    होगा फैसला रब्ब के जहां में भी इक दिन,, "वक्त है" वक्त इक दिन तुमपे भी आएगा ।।




    @रुचिका ढौंडियाल