• shivamnahar 15w

    #माँ #जनमदिन_मुबारक़

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    माँ

    मेरी तुम प्यारी नज़रों में बसी, एक सुंदर चित्रकला हो तुम,
    मेरे मन में बसी मधुर धुन की, कोई राग सी हो तुम,
    तेरे चेहरे की मुस्कुराहट बसी है मेरे दिल में जो,
    मधुर तुम एक वैदेही का कोई प्यारा रूप हो तुम माँ,
    मैं लिखना जो भी सीखा हूँ, कलम तुमने थमायी थी,
    मेरे हर गम में, माँ तेरी भी आंखें भर आयीं थीं,
    मैं हर पल एक ही सुध में, यूँ खोया रहता हूँ जो अब,
    कि तू ना होती मेरे वजूद की ना बात होती तब,
    ये तारे हैं, ये नदियाँ हैं, ये जो भी हवाएं हैं,
    तेरे होने पर ही मुझको हमेशा अच्छी लगती हैं,
    मैं जब भी होता हूँ बेचैन, मुझे ये रैन सताती है,
    मेरी आँखों को, प्यारी गोद तेरी, सुकूँ दिलाती है,
    मैं जो किसी पथ पर, अकेला जब भी होता हूँ,
    तेरा एहसास, मेरा हाथ थामे संग में चलता है,
    मेरी जो भी मुसीबत हो,चाहें क़िस्मत यूँ हस्ती हो,
    तुझे आता है, बदलते कैसे हैं 'रेखा' नसीबों की,
    मैं जो भी हूँ, तो बस हूँ एक ढाँचा वो भी बैरंग सा,
    तू जो भी है, वो है मेरे हर सपनों की रंगरेज़,
    बताना ये कि मुश्किल है,कि कितना चाहतें हैं हम,
    मेरी बस ये दुआ है अब, रहें हर जन्म में संग हम,
    मुबारक हो, जनमदिन आपको, ख़ुशी से हो भरा हर पल,
    मिले बस तू मुझे,हर दम,चाहें कोई हो जन्म दूजा या कोई हो वो दूजा कल...!!!