• vikasveersoni 15w

    By unknown writer

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    बाहर दिल नहीं लगता घर में घुटन सी होती है,
    जाने क्या बिछड़ा है दिल में चुभन सी होती है.

    कल तक खुश था मैं तो ये एहसास नहीं आया,
    अब किसी को हंसता देखूँ तो जलन सी होती है.

    बरसातों के मौसम गुज़रे कई महीने गुज़र गए,
    पर आँखों में अब भी अक्सर सीलन सी होती है.

    बहारें घाव करती हैं, ये चाँद सोने नहीं देता,
    अंधेरा रास आता है रौशनी से उलझन सी होती है