• cathartic_tales 6w

    खुद को बर्बाद होते हुए देखना भी अजीब ही है,
    कभी लगता है इसका मै हकदार हूं,
    तो कभी खुद को शिकार समझने लगता हूं,
    इसको न रोकता हूं, न बढ़ाता हूं,
    बस बेहने देता हूं, नदी की तरह,
    सपने जो देखे थे, आखिर ख्वाब ही तो थे,
    बचपना समझ के टाल दिए,
    एक तू ही तो है जिससे सहारा मिलता है,
    पर वक़्त है, हालात नहीं देखता,
    तूझे खोने का ही डर है बस,
    जिंदगी ने बाकी सब सेहने की हिम्मत तो दे दी थी,
    ये जुदाई बर्दाश्त नहीं होती, लगता है हार ना मान जाए
    किसी भी पल, बस, किसी भी पल।
    ©its_devanshsingh