• cathartic_tales 6w

    अकेला हो गया हूं इस जहां में, कुछ अपना नहीं लगता;
    कितने मौके दिए थे मुझे, अब तो हिसाब नहीं रखता;
    कितनी ही बार माफ़ किया था मुझे, क्या करूं होश नहीं रहता;
    और कितने दुख दूंगा तुझे, दिल से तो एक नहीं देता;
    खुशियां देना चाहता हूं बस, कमभक्त मुकद्दर साथ न देता;
    तूझे खोना नहीं चाहता हूं, ऐसे मै रह नहीं सकता;
    इस हालत मै जी नहीं सकता।
    ©cathartic_tales