• kusumsharma 6w

    वंदन

    ओम
    मृत्युंजय महादेव
    भव भय हारी।
    भवानीपति उमानाथ
    महाकालेश्वर महादेव।
    आपको शत्-शत् वंदन
    सृष्टि के कल्याण हेतु।
    गरल पान कर
    कंठ में ही रोक लिया
    ह्रदय में प्रभु राम जो बसे थे
    नीलकंठाय कहलाने वाले।
    आदि योगीश्वर, आदि गुरु
    कैलाशपति पार्वती कांत
    हम सबकी सदैव रक्षा करें।
    मेरे भाव रुपी पुष्प आपको
    सादर समर्पित हैं
    इन्हे स्वीकार कर।
    कृपा कीजिए

    कुसुम
    ©kusumsharma