• secretsayar 38w

    इनकार

    आज रात फिर से नींद नही आई,

    क्योंकि आज रात के पहले पहर के सपने में,
    फिर वो हमसे मिलने आयी।

    वो जख्म तो भर गए पर वो दर्द आज भी है,
    जब उन्होंने हमें इनकार किया।

    ना वो रात भूल पाये,
    ना ही वो बात
    हम तो आज भी उन्हें उतना ही चाहते है,
    जितना उन रात की तन्हाईयो में।

    काश आपके दिल के तख्त पर हमारा नाम होता,
    काश आपने हमारे दिल के पैगाम को किया, सलाम होता।

    माफ करना,
    आज हमारे हाँथ आज भी रुक न पाए,
    फिर से कुछ लिखने का दिल चाहा,
    और हम फिर से,
    अपने लफ्ज़ो को आपकी तस्वीर में लिख आये।

    ख़ैर कोई नही,
    अब तो इन तन्हाईयों में जीने की आदत सी हो गयी है।
    ©secretsayar