• milind_ek_kavi 5w

    रूपसी
    ओ प्यारी सी रूपसी,
    कितनी हो तुम प्यारी,
    बनाया खुदा ने तुम्हें,
    बहुत ही करीने से,
    गुणों की तुम खान,
    रूप तुम्हारा बेमिसाल,
    आती हो जब सपनें में,
    नींद उड़ जाती अक़्सर,
    गालो में गुलाब कली,
    मासूम सी तुम्हें बनाती,
    सुर्ख लाल होंठ तुम्हारे,
    मदहोश मुझे बनाते,
    ख्वाहिशो का ख्वाब हो,
    मिलने को मैं बेताब हुँ।
    सुकून के पल वो होंगें,
    जब हाथों में हाथ होंगे,
    सांसो में सांसे घुलेगी,
    बाहों में बाहे भी होंगी।
    मिलिन्द एक कवि