• lakashmipati_sr 34w

    Understand

    हरि गुन गाबै हरशि के, हृदय कपट ना जाय
    आपन तो समुझय नहीं, औरहि ज्ञान सुनाय।

    अपने हृदय के छल कपट को नहीं जान पाते हैं।
    खुद तो कुछ भी नहीं समझ पाते है परन्तु दूसरों के समक्ष अपना ज्ञान बघारते है।

    Hari gun gabai harashi ke , hirday kapat na jaye
    Aapan tau samujhay nahi ,aaurahi gyan sunai .

    People sing the merit of God with pleasure , duplicity does not go from heart.
    Himself does not understand anything ,but recites to others.

    ©Kabiradas