• dr_pradeep_sehgal 15w

    कवि का वनपथ

    कवि के वनपथ में...,
    गतिमान इस जीवन में....,
    आकर फ़िज़ा के रूबरू --
    भर ले दोनों हाथोँ से...,
    इन पलों की नज़ाकत ,
    ये फ़िर न आयंगे !!
    ©dr_pradeep_sehgal