• yashrajsingh 22w

    तूझसे क्यु कर ना हो, उमृभर की वफा

    कभी सागर की मजधार था जीवन
    आकाश सा तन्हा था ये मन
    तेरी नीगाह-ए-करम, हम बिखरे बिखरे सँवर गए

    तेरी ठोकर का असर कुछ यूं हुआ,
    गिरते-संभलते राह पर ओर निखर गए

    ©yashrajsingh