• reeta_rai 15w

    याद-ए-हबीब- यार की याद
    सोज़-ओ-इज़्तिराब -मानसिक वेदना, बेचैनी, व्याकुलता

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    हालात

    मोहब्बत ने मेरी यह, कैसी हालात कर दी है,
    याद-ए-हबीब ने बेजार कर दी है,
    आती नही, अब तो सोज़-ओ-इज़्तिराब के सिवा नींद भी,
    दर्द मेें जीने की आदत कर दी है.
    ©reeta_rai