• akshay15019 6w

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    कठिन शब्द
    1. ग़़फलत- असावधानी
    2. ग़श - बेहाल
    3. ज़ीनत - शोभा
    रचना- नन्हा पायसन
    शून्य सी शांति का पसरना
    सुबकते दुबकते परोक्ष अपरोक्ष से बिब्म में
    ग़़फलत गशे हाल में एक माँ मातृत्व की पीड़ा से कराहती हुई
    ज़ीनत का न कोई मोह बस निस्तब्ध से खड़ी थी
    अपने ही धुन में बेसुध सी पड़ी थी

    आखिर वो सुन्दर बेला भी आयी
    नन्हे पायसन की धरा मिलन की वेला भी आई
    मौसम कोहरे की परवानियत में अटा पड़ा था
    कभी खुराघात का डर सताए
    कभी माँ अपनी कई दिनों की नींद को भगाये
    उसको अपने नन्हे पायसन की चिंता सताए
    एक तरफ माँ थूथन से दुलारने में लगी थी
    दूजी और उसे अपने पायसन की चिंता सताने लगी थी

    बेसुध भूख को मिटाने कई शिकारी अपने घर को छोड़ रहे थे
    माँ की अंगभूत बेढाल सरंचना को तोड़ रहे थे
    एक शिकारी की सहसा नजर पड़ी
    आँखे आसान से शिकार की और अडी
    उसने अपने जबड़ो में उसको जकड़ा
    और पुरे जबड़ो के जोर में उसको जकड़ा
    जीवन को बचाने की आपाधापी में उसने जोर से आवाज दागी
    बेसुध से माँ अपने नन्हे शावक को बचाने को भागी

    अंत में माँ का ममत्व जीता
    प्रकति का शाश्वत सत्य रीता
    माँ जीवन है, माँ उद्दीपन है
    माँ सूनेपन में भी आस है
    माँ शब्द ही नि-स्वार्थ है
    इसलिए ही "माँ" शब्द ही इतना खास है।।

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    रचना- नन्हा पायसन
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    ©अक्षय चम्पावत