• sharmaji1 23w

    Kahi Dekha Ta Usko Rote

    कही देखा था उसको रोते जैसे मानो अंधेरो को अंधेरो के साथ सोते
    शायद खोया था उसने किसी को वरना नही देखा किसी को इस तरह रोते

    रिशतेदारी नही थी उनसे हां तालुक़ात तो था
    फिरभी न रोक पाया उन आशुओ को शैलाब होते होते
    ऐ खुदा काश तु आशुओ के भी दंदँ बयां कर देता इतनी रात न लगती ये बात सोचते सोचते


    Written By- Ranvir sharma