• priyanshu93 7w

    दूर रहकर प्यार नहीं होता क्या मुझको बताओ कोई
    Arrrrrreeeeeee तेरा मेरे सिरहाने होना ही मुझको आराम देता था
    अब तो मेरी नींदें भी बेचैन हैं तेरे बिना

    दूर रहकर के चाँद अपनी चांदनी से क्या धरती को सजाता नहीं
    दूर होने से क्या समुन्दर बादलों की प्यास बुझाता नहीं
    तड़पती सी बेचैन साँसों को क्या तू ही बता हमनशि मेरे क्या हवाओं का अनदेखा झोखा आराम पहुंचाता नहीं,

    फिर बस मुझको इतना बता दे क्यों इस कदर तूने अपने जीने के सलीके बदल लिए,
    जी तो मे पहले भी रहा था
    फिर क्यों चंद पलों को मुझसे मिली और
    फिर तुमने अपने जीने के सलीके बदल लिए


    अरे इतना शक मेरे ईमान पर था तुझको तो मेरे मन मैं आस तूने चाहत पाने की जगाई क्यों,
    मर जाने दिया होता मुझे देकर के घूंठ भर पानी की बूँदें मेरी प्यास बुझाई क्यों ।

    ©priyanshu93