• riturajupadhyay 5w

    माँ और आँचल

    उतनी तो बातें नहीं कह सकूँगा माँ आज भी मै क्यू की, जब तुम्हारी बात आती है तो बातें कम यादें ज्यादा याद आती है। याद है माँ वो तुम्हारा आँचल वो आँचल जिसमे छिप कर पर मै सबसे ज्यादा महफूज़ महसूस करता था, पर माँ पिछले चौदह सालों से बहोत डरफ़ोक सा हो गया हूं शायद तुम्हारे आँचल से दूर हो सा हो गया हूँ इसलिए। हर एक बातें मैं कह नहीं पाता हूँ तुमसे क्यूंकि सोचता हूँ तुम्हें तकलीफ होगी मेरी तकलीफ से क्यूँकि तुम कुछ ऐसी ही तो हो मेरी तकलीफ को अपनी तकलीफ बना लेती हो पर हां माँ तुमसे दूर हो कर बहोत तकलीफ होती है। माँ पिछले चौदह सालों से बहोत अलग सी ज़िन्दगी जी है मैंने यहां मैं अपनी बातें ख़ुद से कह लिया करता हूं, खुद से रूठता और खुद ही मना लिया करता हूं। माँ जिस आसमां को छूने के लिए तुमने अपने सुनहरे पिंजरे से उड़ाया था वो आसमां बहोत काला है माँ और इस आसमाँ में मैं भी मैला हो गया हूं पर बस माँ अब शाम हो गयी है मैं भी ये बनवास ख्तम कर के अपने घर लौटना चाहता हूं माँ... फिर से वो आँचल के छांव में सोना चाहता हूं माँ... बस अब मेरे पंख उधङ से गए हैं अब बस अपने छोटे से पिंजरे में बंद कर लो मुझे ये दुनिया की आज़ादी से ज्यादा तुम्हारी गुलामी पसंद है माँ।फिर से वो आँचल वो बादल वो नैनों में काजल, वो घर वो आँगन वो बचपन के सावन, वो अमियां वो मुँगफ़लियां वो हाथों की नरमियाँ फेर दो माँ बस अब ये बनवास ख्तम कर दो माँ।।।
    माँ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
    ©riturajupadhyay