• riturajupadhyay 23w

    घर

    मैं घर लिखूं तो तुम माँ समझना
    मैं माँ लिखूं तो मेरी जान समझना
    मेरी सांसो की डोर जुड़ी है उस घर से
    जिस डोर की छोर बंधी है हम सबसे
    वो डोर टूटी तो मेरे प्राण समझना
    मैं घर लिखूं तो....

    मैं आँगन लिखूं तो संसार समझना
    संसार लिखूं तो मेरा परिवार समझना
    मेरे बचपन की यादों का पिटारा है वो आँगन
    गिरना उठना सिखाया जो प्रांगण
    वो आँगन जो फूटे तो मेरा स्वाभिमान समझना
    मैं आँगन लिखूं तो....

    मैं चबूतरा लिखूं तो तुम लङकपन समझना
    मैं लङकपन लिखूं तो मेरा बचपन समझना
    वो चबूतरा जिसकी यादें अभी तक जेहन से नहीं उतरा
    वो उतर गया तो मेरा पचपन समझना
    मैं चबूतरा लिखूं तो...

    मैं छत लिखूं तो शाम समझना
    शाम लिखूं तो बेइन्तेहाँ प्यार समझना
    वो शाम जिसमें दिन रात का मिलन हुआ
    वो शाम ढल जाए तो बिछड़न समझना
    मैं छत लिखूं तो...
    ©riturajupadhyay