• abhilekh 25w

    सीने में न सही, जिस्म पर ठहर जाने दे,
    इश्क़ न सही, पीठ का तिल बन जाने दे।।

    तू करे भले पर्दा, लेकिन दुआ है वो सरके,
    मेरे दीदार से ही, उसे भी बहक जाने दे।।

    आईने में तू तरसे यूँ ही, मेरे दीदार के लिए,
    तेरी तन्हा पीठ पर मुझे, तेरा हो जाने दे।।

    तेरी करवट में, हर सिलवट में, रहूँ मैं शामिल
    तेरी परछाई न सही, इक निशाँ हो जाने दे।।

    बेशक तुम में जो है बला की खूबसूरती,
    उसी ताज(महल) का इक चांद हो जाने दे।।

    पीठ का तिल//

    ©abhilekh