• aish21 5w

    Traffic police

    रोज़ श्याम ढलते ही
    गाड़ियों का शोर घर जाने की बेसब्री बखूबी बताता है।
    कोई रुकने को तैयार नहीं पर सिग्नल के आगे किसका ज़ोर चल पाता है।
    आड़ी तिरछी सड़कों का हर कोना भर जाता है,
    जिसको जहाँ जगह मिल जाए वो उस रास्ते बढ़ जाता है।
    पर है कोई जो,वहाँ वर्दी में दूसरों को राह दिखता है,
    हर श्याम उसका भी परिवार है, जो जल्दी आने की आस लगाता है।

    आज भी एक तरफ़ आम दिनों की तरह सिर्फ सर दुखाने वाला शोर था और अकेला सबको संभालता वो खड़ा दूजी ओर था।
    समय बीता जा रहा था और सब्र कहीं लंबी कतारों में धक्के खा रहा था।
    जाम को भी उस अकेले इंसान पर तरस नहीं आ रहा था ,
    और वो है कि अपना पूरा ज़ोर जाम खोलने में आज़मा रहा था
    कहीं दूर गाड़ी में बैठे एक शख़्स को ये रास नहीं आ रहा था और कुछ देर बाद जब उसे देखा तो वो उस अकेले इंसान का हाथ बटा रहा था।

    धीरे धीरे एक से दो, दो से तीन ये कारवां बढ़ता चला जा रहा था और वो इंसान अब अकेला न था क्योंकि उसके साथ आम आदमी का एक गुट था जो जाम मिटा रहा था।

    यही नज़ारा देखकर मेरा मन बड़ा सुकून पा रहा था कि आज इंसान अपनी इंसानियत दिखा रहा था ।

    ©Aishwarya