• vanyaa 14w

    तुम

    कुल्फ़ी-सी मीठी मुस्कान लिए
    जब मेरी ज़िंदगी में आए थे तुम,
    मुझे कहाँ पता था कि मेरे सबकुछ बन जाओगे तुम;

    मेरे सुबह की मुस्कान हो तुम,
    दोपहर की नींद हो तुम,
    शाम की इलाइची-वाली चाय हो तुम,
    रैन का सुकून हो तुम;
    सर्दियों की कच्ची धूप हो तुम,
    पतझड़ की ठंढ़ी हवाएँ हो तुम,
    बसंत के रौनक हो तुम,
    गर्मियों में सुराही-वाले शीतल पानी हो तुम;

    मेरा सबकुछ ही तो हो तुम...
    ©vanyaa