• satyam_kumar11 14w

    हम तेरी मुहब्बत में आफताब बन गए
    जिसमें न धुंआ हो वो आग बन गए

    उगते रहे हैं शूल भी सीने की जमीं से
    जबसे तुम मेरे दिल के गुलाब बन गए

    अब देखना दुनिया को न हो सका मुमकिन
    तुम मेरी निगाहों पे नकाब बन गए

    हम आज तक छुपाते रहे राज ए मुहब्बत
    न जाने तुम किस तरह हमराज बन गए