• mahi20 5w

    कभी - कभी

    पल भर की खुशी में हम ढ़ेर सारा प्यार ढूंढते है
    कभी तो पास होकर भी बैचेन हो उठते है
    कभी अकेलेपन में भी एक सुकून ढूंढते है
    तो कभी नज़दीक होकर भी खुद को दूर पाते है
    कभी हम इठलाते है बलखाते है
    तो कभी मायूस होकर बैठ जाते है
    कभी बेरंग चीज़ों में भी रंग नज़र आते है
    तो कभी उनमें रँग होकर भी बेरंग नज़र आते है
    कभी तो शहद भी कड़वा लगने लगता है
    तो कभी कड़वा भी शहद बन जाता है
    कभी पल भर में हमारे साथ क्या हो जाता है
    हमें तो उस वक्त पता भी नहीं चलता है
    फिर अब ज़िंदगी की क्या ही बात करे
    जब इंसान ही पल भर में मुखोटा बदलता है
    _M.V...