• vaibhavshukla 6w

    वो महज़ रूठा है उसको गंवाया नहीं है
    उसके बिना चैन एक पल भी पाया नहीं है

    दिल के दरवाज़े पर तो धूल जमीं है मेरे
    वो ना जाने कब से यहाँ आया नहीं है

    एक रोज़ गलती से छू लिया था उसने मुझे
    एक वो दिन और एक आज का, नहाया नहीं है

    उससे मिलकर बड़े गौर से देखते हैं सब मुझे
    शायद उसने किसी से कुछ भी छिपाया नहीं है

    झूठ को भी कितनी सच्चाई से लिख दिया मैंने
    मैंने स्याही को यूँ ही बहाया नहीं है
    ©vaibhavshukla