• kuldeep_singh 15w

    ना जाने कब

    ख्वाबों मे ज़िन्दगी जीना अच्छा लगता था,
    ना जाने कब मैं उनके ख्वाबों का रास्ता बन गया।

    जज्बातों मे डूब जाना अच्छा लगता था,
    ना जाने कब मैं उनके समुद्र की धारा बन गया।।

    हँसकर जीना मुझे खूब अच्छा लगता था,
    ना जाने कब मैं उनके हँसी का कारण बन गया।

    हर गम को भी जीना मुझे अच्छा लगता था,
    ना जाने मैं उनके ग़मो का सहारा बन गया।
    ©kuldeep_singh