• raahi_roshan 16w

    अंजान डगर

    इक अंजान डगर पर चलना है
    एक गुमनाम सफ़र पर चलना है

    जहाँ हों राँझे और हीर कहीं
    उस बदनाम शहर में चलना है

    मुझको ना मिले कोई अपना सा
    कोई सच या फिर कोई सपना सा
    जहाँ हो खाली शमशान सभी
    उस सुनसान जगह पर चलना है

    मुझको नही ये भाती दुनिया
    पल पल , हर पल सताती दुनिया
    जहाँ इंसान तो क्या भगवान भी ना हो
    ऐसी वीरान जगह पर चलना है

    जहाँ प्यार के बदले प्यार मिले
    जहाँ बिछुड़े हुए सब यार मिले
    जहाँ कोयल के गीतों में घुली
    उस प्रकृति का वरदान मिले
    मुझको ऐसे हीं जीवन भर
    एकांत जगह पर चलना है

    अंजान डगर पर चलना है .....

    ©raahi_roshan