• iampraful 22w

    YATEEM

    उस यतीम ने मुझसे पूछा
    "भाई कैसा एहसास होता है माँ के होने का?
    कैसा लगता है माँ के गले लग सारी परेशानी खोने का?
    और कितना खुशनुमा होता है वो पल,
    जिसने तुम्हे जन्म दिया है
    उसकी गोद मे अपना सर रख के सोने का???"


    जवाब थे पर कुछ ना था बोला मैंने
    उस यतीम की स्थिति को जरा संभल कर था तोला मैंने
    दिल के दरवाज़े के पीछे कई भावनाए छिपी थी
    पर दरवाज़े को उस यतीम की सोच कर ना था खोला मैंने।


    बस सुनता रहा जो वो अपनी कहानी मुझसे कहता गया,
    उसकी भावनाओ की सुनामी मे मै भी कही ना कही उसके साथ बहता गया।


    यतीम ने कहा की उसने माँ के साथ होने का सुख कभी न पाया है
    रोज़ सुबह सवाल करता है कि उसकी तक़दीर का लिखा उसके लिए आखिर ये दिन क्यू लाया है
    पूछता है खुदा से कि "ऐसा क्या गुनाह किया है मैंने जो अपनी माँ के हाथ का अभी तक एक निवाला भी नहीं खाया है???"


    कह रहा था कि "सब शिकायत करते है कि
    भगवान उन ही की जिंदगी में इतना अँधेरा क्यों लाया है??
    पर सच्चे मायनो मे उसी के ऊपर बदनसीबी का सबसे बड़ा बादल छाया है
    जिसकी किस्मत मे माँ के साथ का सुख नहीं आया है।"


    ये सब बातें बोलते बोलते वो यतीम कही अंदर से ढह रहा था ,
    अपना कलेजा निकाल के दिखा रहा था लोगों को,
    पर नासमझ लोगो को लगा की वो तो सिर्फ चंद अलफ़ाज़ ही कह रहा था।
    उसका और उसकी माँ के साथ की यादो मे बुरे हादसे का पहरा था
    उसके दिल मे अभी भी अपने द्वारा बनाया हुआ, माँ का वो धुँधुला चेहरा था।।


    वो ट्रक उसकी माँ को तो एक क्षण मे ही उससे दूर ले गया था..
    पर जिंदगी भर के लिए उस मासूम बच्चे को ,जिसे लोग यतीम कहते है,
    बचपन मे ही घाव गहरे दे गया था....

    ©iampraful