• itsayushmishra 6w

    कर्म

    कर्म वो प्रकाश की अध्भुत छाया..!
    विकट हिलोरे सब सम्हाल रहे..!
    कर्मयोग की सम्पूर्ण काया..!
    तनी भृकुटि तान रहे..!
    प्रेम करुणा की माया से एक..!
    समय वो अकाट्य रहा.!
    अब बधिर हो हर बंधन से.!
    रण की ज्वाला ताप रहा..!
    किञ्चित अभिमान मन में गढ़ता..!
    ह्रदय को विकराल दो..!
    मनु धर्म में अडिग रहो..!
    कुछ गीता का प्रसाद दो..!
    इस बलिदानी वेशों की प्रतिमा..!
    एक सजल हुँकार रहे...नित कृत्य अमर रहे ..!
    अमर तुम्हारा कृतार्थ हो..
    ©itsayushmishra