• nitikavats 33w

    एक बार फिर...

    बंधने लगे हैं फिर रिश्तों के धागे...
    चले न जोर अब इस दिल के आगे...
    बढ़ाने लगी फिर दिल में बेचैनियाँ...
    धड़कने भी करने लगी मनमानियां...
    ख्यालों में तेरे गुमनाम मेरी राह हैं...
    लबों पे तेरा नाम, जिक्र अब आम हैं...
    जिंदगी न जाने किस मोड़ पे आ चुकी हैं...
    न भुख हैं न प्यास हैं, बस तेरे पे आ रुकी हैं...
    तन्हाइयां अब ढूंढ रही संवेदनाओं का निशां हैं...
    खामोशीयां ये मेरी तुझ में खोने की वजह हैं...
    ©nitikavats