• rahianjana 6w

    राही अंजाना

    राही अंजाना है कहीं अंजाना ही रह ना जाए,

    ज़िन्दगी के इस जटिल सफर में कहीं बेमाना ही रह ना जाए,

    उठाते हैं कुछ अपने ही उंगलियां अपनी,
    कहकर के राही क्या किया तुमने,

    कहीं देख कर उठती उंगलियां खुद पर,
    "राही" भीड़ में शातिरों की कही काफ़िर ही रह ना जाए॥
    राही (अंजाना)
    ©rahianjana