• kavya_ratnakar 3w

    तू बने जो समंदर ,
    तो मैं बनूँ ;
    तेरा छत तेरा अम्बर !
    तू जो रखे अपने भीतर नीर ,
    प्रेम भरकर करूं उसे मैं नील !
    एक दूजे बिन दोनों अधूरे ,
    इसीलिए होते प्रेम के मंथन यहीं पूरे !
    तू बने जो समंदर ...

    ©kavya_ratnakar

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    तू बने जो समंदर ,
    तो मैं बनूँ ;
    तेरा छत तेरा अम्बर !
    तू जो रखे अपने भीतर नीर ,
    प्रेम भरकर करूं उसे मैं नील !
    एक दूजे बिन दोनों अधूरे ,
    इसीलिए होते प्रेम के मंथन यहीं पूरे !
    तू बने जो समंदर ...

    ©kavya_ratnakar