• _mukhtalif_ 5w

    अब उडना है मुझे!!!

    मुझे आज़ाद छोड़ दो
    मुझे ना चाहत इस सोने के पिजंडे की
    मुझे ना आदत डर कर रहने की
    न ही तुमहारी उन मीठी बातों की
    और न ही तुमहारे उन झूठे दिलासों की
    तेरी बाहों में होने की चाह नहीं मुझे
    मेरी राहों मैं होने की ज़रूरत नहीं तुझे
    अपनी राहें खुद चुनने का हक है मुझे
    उन पर गिर कर सम्भलने का हक है मुझे
    कयूंकी अब आदत है मुझे उडने की
    नये लोगों से जुडऩे की
    जो रूठा है उसे टटोलने की
    जो टूटा है उसे जोड़ने की....
    मुझे आज़ाद छोड़ दो अब सिर्फ यही चाहत है मेरी!!!
    ©_mukhtalif_