• sanjeev123 15w

    ये मैं नही ये सभी कह रहे है।
    हम इतना शोषण क्यों सह रहे है।।

    तोड़ दो बेड़िया अब ओर बन्धन बर्दास्त नही होता।
    जकड़ के रखा है लखनऊ ने अब ओर शोषण बर्दास्त नही होता।।

    अब धुंवा नही रहा ये ज्वाला जल चुकी है।
    संगठन की शक्ति खड़ी हो रही है अब हर पश्चिमांचली कि आँख खुल चुकी है।।

    आखिर बेड़ियों में कब तक जकड़ा रहेगा उठो सोते हुए वीरो।
    अपने शोषण से मुक्ति पानी है।अलग प्रदेश बनाना है।।

    अपने लिए जिये तो क्या जिये ये संगठन ने सिखलाया है।
    आने वाली पीढ़ी के लिए जिंदा हो तुम ये बतलाया है।।

    जीवन है चार दिनों का ये यू ही चला जायेगा।
    चल उठ मेहनत कर आने वाली पीढ़ी का जन्म ही तर जाएगा।।
    पश्चिमांचली संजीव चिकारा।।