• gumnam_shayar 22w

    गज़ल

    चलो आज हम यादों के सहारे जाते है
    संग तैर कर दरिया के किनारे जाते है

    हमारी ख्वाईशे अगर ता-जिन्दगी पूरी नहीं होगी
    तो फिर एक दूसरे के हाथों ही मारे जाते है

    अब ख्वाबों को सच का नाम दे रहे हो तो क्या खलिश
    क्या हम कभी भी खिलाफ तुम्हारे जाते है?

    मुश्किलें आई है तो अपना हल भी तो लाई होगी
    अब हर काम की खातिर फ़रिश्ते तो नहीं उतारे जाते हैं

    कोई ठोस वजह चाहिए जिन्दगी खुबसूरत बनाने को
    अब आखिर उम्र बेवजह कबतक गुजारे जाते है

    आखिर तुम भी किस-किस की कुर्बानियो का जायजा लो
    एक चाँद पर नजरअंदाज न जाने कितने सितारे जाते है

    ©gumnam_shayar