• ajayamitabh7 14w

    सरकारी पालिसी:अजय अमिताभ सुमन

    रिक्शेवाले से लाला पूछा चलोगे क्या फरीदाबाद ?
    उसने बोला झटाक से उठकर बिल्कुल तैयार हूँ भाई साब.
    मैं तैयार हूँ भाई साब कि सामान क्या है तेरे साथ ?
    तोंद उठाकर लाला बोला आया तो मैं खाली हाथ .

    आया तो मैं खाली हाथ की साथ मेरे घरवाली है .
    और देख ले पीछे भैया वो हथिनी मेरी साली है .
    वो हथिनी मेरी साली है कि क्या लोगे किराया ?
    देख के तीनों लाला हाथी रिक्शा भी चकराया.

    रिक्शावाला बोला पहले आजमा लूँ अपनी ताकत .
    दुबला पतला चिरकूट मैं तुम तीनों के तीनों आफत .
    तीनों के तीनों आफत पहले बैठो तो इस रिक्शे पर
    जोर लगा के देखूं मैं फिर चल पाता है रिक्शा घर ?

    चल पाता है रिक्शा घर कि जब उसने जोर लगाया .
    टूनटूनी कमर वजनी रिक्शा चर चर चर चर चर्राया .
    रिक्शा चर मर चर्राया कि रोड ओमपुरी गाल.
    डगमग डगमग रिक्शा डोले हुआ बहुत ही बुरा हाल.

    हुआ बहुत ही बुरा हाल कि लाला ने जोश जगाया .
    ठम ठोक ठेल के रिक्शे ने तो परबत भी झुठलाया .
    परबत भी को झुठलाया कि क्या लोगे पैसा बोलो ?
    गस खाके बोला फिर रिक्शा दे दो दस रूपये किलो .

    दो दस रूपये किलो लाला बोला समझा क्या सब्जी .
    मैं लाला इंसान हूँ भाई साली और मेरी बीबी .
    साली और मेरी बीबी फिर बोला वो रिक्शेवाला .
    ये तोंद नहीं मशीन है भैया सबकुछ पचनेवाला .

    सबकुछ पचनेवाला भाई आलू बैगन टमाटर
    कहाँ लिए डकार अभीतक कटहल मुर्गे खाकर .
    कटहल मुर्गे खाकर कि सरकारी अजब किराया है .
    शेखचिल्ली के रूपये दस और दस हाथी का भी भाड़ा है ?

    अँधेरी है नगरी भैया और चौपट करार है.
    एक तराजू हाथी,चीलर तौले ये सरकार है .
    एक आंख से देखे तौले सबको अजब बीमार है .
    इसी पोलिसी का अ़ब तक रिक्शेवाला शिकार है .