• hitanshukbl 5w

    माँ

    पल-पल बिचलित मन में,
    घन घोर अंधेरी रातोँ में,
    तप तप तपती धूपों में,
    झम झम बरसती सावन में,
    कहाँ कहाँ तुझे खोजूं माँ?
    जन- जन, घर- घर, मन- मन
    कहाँ नहीँ बसी हो माँ,
    झर-झर, कल-कल, करती,
    अमृत की धारा में बहती माँ;
    डाल-डाल, पात-पात
    घने बृक्ष की छाओं में,
    बन-बन उपबन खेतों में,
    सर-सर हवा की झोंको में,
    चारों और तुझे देखूं माँ,
    गिरजा-मंदिर-मस्ज़िद में,
    प्रार्थना और दुआओं में,
    धक-धक करती दिलों में,
    हर जगह तुझे पाउँ माँ।
    ©hitanshukbl