• jitender_chauhan 34w

    Darpan

    यू धुए से बेयत उडलिए हम
    अब बादल सा बन्ने को मनसा करता हैं
    जो तराबोर करदे खुशी से इस रेगिस्तान को
    अब बादल बन्ने का मनसा करता है
    चहक लिए चिढ़ियो सा बहोत
    अब चील बन्ने को मनसा इतरता हैं
    कई बार गिरे और रोए मंजिल के लिए
    अब बस सफर पर चलने को
    एक राहगीर सा बन्ने को मनसा करता है
    जीवन के बवन्डर में डूबकर
    गहराई नापने का मनसा करता हैं
    पर समलजा मन बस धोड़ासा
    कुछ सपने पूरे करने कि मोहलत तू
    देदे क्योकि अब कुछ तो करने का मनसा करता हैं
    पर यूहीं सपने कहाँ पूरे हुए करते हैं गालिब
    और जो यूहीं पूरे हो जाए वो सपने कहाँ हूआ करते हैं ☺