• i_am_shivam 3w

    हर गुलज़ार बाग ए रुसवान नहीं होता
    हर मगरुर नादान हैवान नहीं होता
    इन कतरों में अश्कों को मत ढूंढों
    हर कतरा अश्क़ ए दिलशाद नहीं होता

    -: Shivam Upadhyay