• arunbhardwaj 5w

    #arunbhardwaj @vandana_bhardwaj

    ऐ ज़माने सुनो ! गुनगुनाओगे न ?
    मैं गीत-ए-राही बनने चला

    कभी तोड़ना रीति मेरे लिये भी
    प्रीत के ही रिवाजों को लिखने चला

    Arun Bhardwaj (Atirek)

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    दिल की उबासियों में तेरे
    अब नफ़रत की गरम साँस है
    लो ! प्यार मैं खोया तेरा
    तुझे है नहीं , मुझे आस है

    हाँ मेरी तरह तुम सोचते
    क्या चल रहा ख़ास है
    सब दूर हो गुज़र गये
    कुछ सांसे ही मेरे पास हैं

    लो ! प्यार मैं खोया तेरा
    तुझे है नहीं , मुझे आस है

    नींद बिन सोया कहाँ
    ख़्वाबों की दूर बात है
    दुल्हन बनी कितनी दफ़ा
    मेरी सोच में बरात है

    लो ! प्यार मैं खोया तेरा
    तुझे है नहीं , मुझे आस है

    मजबूर अनकहा रहा
    मेरे गीत तेरे पास हैं
    सुनो तो उनकी बात में
    प्यारी अंधेरी रात है

    लो ! प्यार मैं खोया तेरा
    तुझे है नहीं , मुझे आस है

    अंजान इक तरफ़ मेरी
    जुंबा रही वो बात है
    हलक होंठ बीच में
    घुटी घुटी सी साँस है

    लो ! प्यार मैं खोया तेरा
    तुझे है नहीं , मुझे आस है

    फिंजा के मौसमों सुनो
    बयार-ए-बादलों सुनो
    दयार-ए-दर वफ़ा सुनो
    दिल ख़त नहीं अहसास हैं

    लो प्यार मैं खोया तेरा
    तुझे है नहीं , मुझे आस है


    Arun Bhardwaj (Atirek)