• shiv419 5w

    सुबह और शाम

    रोज सुबह शाम तुझे मैं याद करता हूँ
    कुछ इस तरह टूटे दिल को आबाद करता हूँ


    मसरूफ़ तो बहुत हूँ मैं ईस छोटी सी जिंदगी में
    पर तेरे लिए वक़्त निकालकर उसे बर्बाद करता हूँ


    अरसे निकाल दिए जिसने तेरी सलाखों के पीछे
    उस मुजरिम को अब मैं अपनी मर्ज़ी से आजाद करता हूँ.




    -शिव