• iamnitishthakur 6w

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    चिंताएँ

    (Part 3)
    उसपर,दे दिया क़िस्मत में उनके..
    जो पल-पल प्रयास कर-कर के ..
    हल्दी-दूध उसको पिलाएंगे।
    पर एक दिन प्राण-पखेरू उसके उनकी पकड़ के बाहर हो जाएंगे ।

    बखान उसकी पीड़ा का,वो मुख से कभी न कर पाएंगे ।
    झूठ-साँच उसको सुनाकर, बातों में उसको फुसलायेंगे ।
    पर, किशोर होने पर उसके सन्मुख खुले मुँह रह जाएंगे ।

    युक्तियाँ ढूंढते-ढूंढते वो,अधूरा खुद को पाएंगे .!
    हुआ है क्या,असल माज़रा कभी ज़िक्र भी न कर पाएंगे ।
    पैदाइश ही ग़लती है उनकी,कैसे भला सुनाएंगे.?

    हर जतन कर के भी वो कभी,इस घुटन से न उबर,न उबार पाएंगे ।
    ...
    ©iamnitishthakur