• arunbhardwaj 5w

    काहें बदल रही हो ये राहें बार-बार
    ठहर जाती है नज़रें गंगा के उस पार

    मैं हूँ किनारे , ये दिल "जीत" हारे
    कभी हारो ज़रा ऐ बनारस के प्यार

    वो अजमेर था , जो शराफ़त भरा
    उसे लखनऊ बुलाये, नबाबों के द्वार


    Arun Bhardwaj (Atirek)