• darakhat_poetry 6w

    बादल का पैग़ाम आया था।
    बूंदों का तोहफ़ा लाया था।
    मुद्दतों बाद सावन आया था।

    बारिश से मिट्टी गिला था।
    आसमां का रंग भी पिला था।
    दामन ए आँगन भीगने के बाद सूना था।

    आसमान में पूरा चाँद आया था।
    संग अपने चाँदनी लाया था।
    शबनम में उसका ही छाया था।

    ज़िन्दगी में एक मेहमान आया था।
    मोहब्बत का आयना लाया था।
    उस दर्पण में अपना चेहरा छिपाया था।

    दर्पण टूटने का आवाज़ आया था।
    सनम के नैनों में फ़रेब का साया था।
    बारिश इक तूफ़ान लाया था।
    ©-प्रशिव