• anirudhtrivedi 15w

    माँ

    गोदी में रख कर सर मुझे किस्से सुनाती थी
    कभी धरती कभी सूरज कभी चंदा बनाती थी....

    मुश्किल बहुत होता कि मेरी नींद फिर टूटे
    धीरे धीरे दामन से मां मेरा यूँ सर हटाती थी....

    कोशिश बहुत की पर मैं अब अच्छा नहीं लगता
    अलग सा नूर था जब माँ मेरी मुझको सजाती थी.....

    दौलतें सारी मेरी ये दोजखों से कम कहाँ
    जन्न्त तभी थी जब मेरी माँ मुस्कुराती थी....

    ©anirudhtrivedi