• saurabh_thapliyal 5w

    रखा क्या है

    तेरा दीदार जो हुआ काफी है,
    अब पुष्प बहारों में रखा क्या है।

    मुझे मोहब्बत हो गयी तेरे चाँद से चेहरे से,
    अब पुरनूर सितारों में रखा क्या है।

    तेरे संदली बदन की वो चंदन सी खुश्बू,
    अब इत्र हज़ारों में रखा क्या है।

    जब कश्ती मौजों में आ ही फंसी है,
    तो सुदूर किनारों में रखा क्या है।

    ©saurabh_thapliyal