• kishore_nagpal 23w

    सब कुछ गुरुजन

    जीवन में सच्चा संबंध सिर्फ अपने राम से और गुरुजनों से।

    जीवन में अगर कोई *अपना* है तो सिर्फ गुरुजन और प्रभु।

    अगर जीवन में नि:स्वार्थ भाव से कभी कोई आपको कुछ दे सकता है तो सिर्फ गुरुजन और प्रभु।

    जीवन में सच में अगर आपकी मुसीबत में कोई, आपकी सोच से भी परे जाकर कोई आपकी मदद कर सकता है तो सिर्फ गुरुजन और प्रभु।

    जीवन में आपके एकाकी पलो के समय, जब दूसरे सभी सांसारिक और पारिवारिक मुख मोड़ लेते हैं, तब अगर कोई आपको अपना मानकर आपको मरहम लगा सकता है, तो सिर्फ गुरुजन और प्रभु।

    जीवन में अगर कोई सच्चा रिश्ता निभा सकता है, तो सिर्फ गुरुजन और प्रभु।



    गुरुजन कहते हैं कि ये बात जितनी जल्दी समझ में आ जाये, उतना अच्छा। अगर इसी जन्म में समझ में आ जाये, तो भी अच्छा। अन्यथा लोग जन्मो जन्मांतरों तक भटकते रहते हैं और इन्हीं नश्वर सांसारिक संबंध, जो
    *सिर्फ जरुरतो और प्रारब्धो के अनुसार निभाते जाते हैं*
    उन्हीं में खोये रहते हैं, और जन्म मरण के चक्कर और माया में फॅसे रहते हैं।

    जब तक हम गुरुजनों पर पूरा विश्वास करके उनके हमारे साथ अकारण ही निभाये जाने वाले प्रेम का रस नहीं चाहते,
    तब तक इन सांसारिक रिश्तों की बातें चला करती है।
    जो एक बार गुरुजनों के प्रेम में डूबा जाता है, बसससस वो ही निहाल।।।





    जय जय राम
    जय जय राम