• eknoor 49w

    कैसी है ये फिक्र,
    कहीं कहीं तो इतनी है,
    और कहीं कभी देखी ही नहीं।

    कहीं तो न चाहते भी बरस जाया करती है,
    और जहां ढूंढ़ा करते हैं,
    वहां अक्सर मुंह मोड़ लिया करते हैं वो।

    जिसकी हमें हैं,
    उसको हमारी नहीं,
    और जिसको हमारी है,
    उसे हम जानते नहीं।

    अक्सर सुना करते हैं,
    "हमें फिक्र है तुम्हारी",
    कोई ये तो समझाए,
    यूं कभी दिखी क्यों नहीं,
    गर कुछ सच में दिल में है तो,
    ये फिक्र हमारी।

    ©एकनूर कौर

    ~Flowing with the Flow