• pragya_ratan 15w

    प्यार तेरा इतना शीतल है,
    हर जलन से राहत दे जाता है।
    ज़ख्म कितने भी गहरे हों,
    मरहम सा वो बन जाता है।
    बाँहों में भरकर मुझे,
    जब धीमे स्वर में समझाते हो।
    टूटे हुए सहमे से दिल में,
    इक नयी उमंग भर जाते हो।
    ज्यादा सपने नहीं हैं मेरे,
    ना कोई ज्यादा चाहत है।
    तेरे प्यार की छावँ में,
    बस एक बसेरे की चाहत है।
    हो जब बारिश हद से ज्यादा,
    मेरी छतरी बन जाना तुम।
    फिसलन जो हों राहों में तो,
    मुझे हाथ पकड़ संभालना तुम।
    दुनिया जब दे गम ही गम,
    थोड़ा प्यार जताना तुम।
    कहीं खो जाऊँ जो कभी तो,
    हक़ से मुझे बुलाना तुम।
    गलती कितनी भी बड़ी हो,
    हक़ से उसे सुधारना तुम।
    अपने प्यार की शीतलता से,
    मेरे हर दर्द मिटाना तुम।।
    ©pragya_ratan